79 साल बाद जनता का सवाल: क्या हम सच में आज़ाद हैं? 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ था। आज़ादी को 79 साल हो चुके हैं। लेकिन आज सवाल यह नहीं है कि भारत अंग्रेजों से आज़ाद है या नहीं। आज सवाल यह है— क्या भारत का आम नागरिक गरीबी से आज़ाद है? क्या वह भुखमरी से आज़ाद है? क्या वह बेरोजगारी से आज़ाद है? क्या वह भ्रष्टाचार से आज़ाद है? क्या वह जातिवाद से आज़ाद है? क्या वह सामंतवादी सोच से आज़ाद है? और सबसे बड़ा सवाल— क्या वह सत्ता से सवाल पूछने में पूरी तरह आज़ाद है? यह सवाल मैं किसी एक पार्टी से नहीं, हम सब से पूछना चाहता हूँ। जनता ने सत्ता दी है, फिर सवाल करने से डर क्यों? हमारे देश में सरकारें जनता चुनती है। हम अपने वोट से नेताओं को संसद और विधानसभा तक भेजते हैं। हम उन्हें सत्ता देते हैं, पद देते हैं और निर्णय लेने का अधिकार देते हैं। तो फिर सवाल यह है— जिस जनता ने किसी को सत्ता में बैठाया है, क्या वही जनता उससे सवाल नहीं कर सकती? अगर कोई नागरिक पूछता है— “यह फैसला क्यों लिया गया?” “इस योजना में इतना पैसा क्यों खर्च हुआ?” “बेरोजगारी क्यों है?” “भ्रष्टाचार पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?” “सरकारी...
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